इन कारणों से फैलती है बीमारी
लंपी त्वचा रोग एक ऐसी बीमारी है जो मच्छरों, मक्खियों, जूं एवं ततैयों के कारण फैलती है. यह मवेशियों के सीधे संपर्क में आने और दूषित भोजन एवं पानी के माध्यम से फैलती है.
पशुपालकों को किया जा रहा जागरुक
आपको बता दें कि इस बीमारी को देखते हुए पशुपालन विभाग के चिकित्सक सक्रिय हुए और गांवों का भ्रमण कर बीमार मवेशियों का स्वास्थ्य जांचा. बीमार पशुओं में हल्के से तेज बुखार, शरीर पर दाने, नाक और मुंह से लार आने के लक्षण दिखाई देने पर पशु चिकित्साधिकारी डॉ.आर.चंद्रा ने बताया कि बीमारी के लक्षण लंपी स्किन डिजीज के हैं. इस बीमारी में घबराने की जरूरत नहीं है दो से तीन दिन तक इलाज कराने पर पशु ठीक हो जाते हैं.
लंपी वायरस के लक्षण: इस वायरस के प्रकोप से पशुओं के पूरे शरीर में बड़े-बड़े दाने निकल रहे हैं. फिर पशुओं को तेज बुखार आ रहा है. पशु खाना पीना छोड़ रहे हैं. करीब एक सप्ताह के बाद पशु अपनी जगह पर से उठ नहीं पा रहे हैं. समय से उपचार नहीं मिलने के कारण पशुओं की मौत भी हो रही है.
लम्पी संक्रमण से बचने के पशुओं को दें यह औषधियां
लंपी संक्रमण से बचाने के लिए पशुओं को आंवला,अश्वगन्धा, गिलोय एंव मुलेठी में से किसी एक को 20 ग्राम की मात्रा में गुड़ मिलाकर सुबह शाम लड्डू बनाकर खिलाएं. तुलसी के पत्ते एक मुट्ठी , दालचीनी 05 ग्राम सोठ पाउडर 05 ग्राम , काली मिर्च 10 नग को गुड़ में मिलाकर सुबह शाम खिलाएं. संक्रमण रोकने के लिए पशु बाड़े में गोबर के कण्डे में गूगल,कपूर,नीम के सूखे पत्ते , लोबान को डालकर सुबह शाम धुआँ करें. पशुओं के स्नान के लिए 25 लीटर पानी में एक मुट्ठी नीम की पत्ती का पेस्ट एंव 100 ग्राम फिटकरी मिलाकर प्रयोग करें. घोल के स्नान के बाद सादे पानी से नहलाएं.
संक्रमण होने के बाद इन देशी औषधियों का करें इस्तेमाल
अगर आपके पशु को लंपी वायरस का संक्रमण हो जाता है तो एक मुट्ठी नीम के पत्ते, तुलसी के पत्ते एक मुट्ठी,लहसुन की कली 10 नग लौग 10 नग,काली मिर्च 10 नग जीरा 15 ग्राम हल्दी पाउडर 10 ग्राम पान के पत्ते 05 नग, छोटे प्याज 02 नग पीसकर गुंड में मिलाकर सुबह शाम 10-14 दिन तक खिलाएं.
संक्रमण के दौरान खुले घाव के देशी उपचार
नीम के पत्ते एक मुट्ठी , तुलसी के पत्ते एक मुट्ठी , मेहंदी के पत्ते एक मुट्ठी लेहसुन की कली 10 हल्दी पाउडर 10 ग्राम , नारियल का तेल 500 मिलीलीटर को मिलाकर धीरे-धीरे पकाये तथा ठण्डा होने के बाद नीम की पत्ती पानी में उबालकर पानी से घाव साफ करने के बाद जख्म पर लगाये. साथ ही किसी भी पशु में बीमारी होने पर नजदीक के पशु चिकित्सालय पर सम्पर्क करके उपचार कराएं. किसी भी दशा में बिना पशु चिकित्सक के परामर्श के कोई उपचार स्वंय न करें. लम्पी स्किन बीमारी से बचाव हेतु पशुपालन के कर्मियों द्वारा अभियान चलाकर गोवंशीय पशुओं को टीका निःशुल्क लगाया जा रहा है. सभी पशुपालक अपने पशुओं को टीका अवश्य लगवाएं.
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इससे सही नहीं होने पर कृपया तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें
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